स्वचिन्तन व मनन से हृदय की गहराईयों से उत्पन्न शब्दों को कविता व लेख से "My Heart" के माध्यम से सत्य, सार्थक, चेतनाप्रद, शिक्षाप्रद विचारों को सहृदय आपके के समक्ष प्रस्तुत करना हमारा ध्येय है। सहृदय आभार! धन्यवाद।
Friday, 23 April 2021
वाह रे इंसान.....
Saturday, 17 April 2021
अब देखो केवल डीडी....
Monday, 15 March 2021
क्या हो जाता....
क्या हो जाता गर हम खामोश रह जाते।
चंद लम्हों के रिश्तों में तम नहीं आते।
क्रोध प्रेम प्यार अपने गर समझ पाते।
कम से कम जीवन में सबके गम नहीं आते।
🙄
सत्य शाश्वत सत्य है जाएगा जो आया।
वक्त का संतोष होता दुख बेवक्त देता।
जिन्दगी जिन्दादिली संघर्ष से नाता।
क्रोध व नफरत इंसा के प्राण हर जाता।
🙄
क्या हो जाता हम अगर खामोश रह जाते..?
😣
धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"....✒
Sunday, 14 March 2021
बुढ़ापा बिमारी और ईलाज....
खर्राटा मच्छर पत्नी.....
यार सुबह हो गयी मेल्हते मेल्हते।
मच्छर दूर हुआ फैन चालू किया।
झेल तब मैं गया धुन पत्नी चली।
खर्राटा पत्नी फर्राटा भरने लगी।
यार सुबह हो गयी मेल्हते मेल्हते।
दुश्मनों में मेरी रात ऐसी फंसी।
रात भर नींद मेरी तड़पती रही।
जालिम रात के दुश्मनी साधते।
बेचारे हम पति कुछ कर न सके।
नींद लगती नहीं प्यास लगती बड़ी।
परेशां हो गए बाथरूम जाते आते।
वो घड़घड़ाते रहे और सोते रहे।
थक गए हम उठक बैठक करके।
मच्छरों का ईलाज जैसे तैसे बहुत।
खर्राटे का ईलाज बताओ कोई।
Saturday, 13 March 2021
युवा जाए विदेश....
Wednesday, 3 March 2021
जीवन का वायरस....
अपने मन मस्तिष्क न रखना।
खुशियों का दुश्मन यह होता,
जीवन को बर्बाद नहीं करना।
मन अपना एक्टिव रखना,
एन्टी वायरस इसे समझना।
मन स्वस्थ तो पंगू वायरस,
मन कमजोर अपने न करना।
कमियाँ चाहे जिस किसी की,
हमेशा याद नहीं करने की।
Friday, 26 February 2021
नमन हे माँ...
नमन हे माँ...
💝
ममता सुखी घर मंदिर होती।
ममता दुखी घर जंजाल होती।
त्याग सुख किसके लिये जीती।
समझ तुझे नहीं इसकी होती।
अपने सुख दुख भूली रहती।
तेरे नींद सोती माँ जगती।
दिन को दिन न रात समझती।
अहसास नहीं भावना उसकी।
था अबोध तुझे ज्ञान न उसकी।
रहे सुखी हर जतन माँ करती।
ममता की देवी कामना करती।
नमन सभी ममता को "धीर"।
कभी दुखी माँ हो न अधीर।
🙏🙏
✒......धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"
Thursday, 18 February 2021
जहां में सब तेरा अपना...
Tuesday, 16 February 2021
घरवाली हो नौकरी वाली...
ससुराल मायका बहू बेटी...
ससुराल मायका बहू बेटी... 🍁🍁 ससुराल मायका बहू बेटी! दोनों जहान आबाद करती। मायके से ट्यूशन गर लिया, दुखों का जाल बिछा लेती। जहां कभ...
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बरसे बदरी... 🌧🌧 बरसे बदरी भोरहरी से, तर भयी मौसम सबही के। ऐसी बारिस हो रही आज, गोताए सबही घरही में। प्रकृति जन खुश हैं आज, ...
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💞~:माँ:~💞 जिसने हमको स्वयं लिखा! शब्द नही जो उस पर लिखूँ। 💌 तुम लक्ष्मी हो तुम सरस्वती हो; तुम माँ अन्नपूर्णा सी देवी हो। ...
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एक जमाना ऐसा.... 🍁🍁 एक जमाना ऐसा भी था, हर घर हर आंगन खुश था। परिवार एकजुट रहता था, जीवन हंसी खुशी होता था। छोटे बड़ों का अदब ल...
