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Thursday, 6 May 2021

ऐसी कोई रात नहीं....

ऐसी कोई रात नहीं..
🍁🍁
ऐसी   कोई   रात   नहीं,
जिसकी  सुबह  न हुयी।
गम की अंधेरी रात बड़ी,
उगा  सूरज तो छट गयी।

सुक्रिया मेरे मालिक की,
हर  सुबह  आँख खुली।

दिन ढ़ली फिर रात हुयी,
रात   गयी   सुबह  हुयी।
प्रकृति  का  दस्तूर  यही,
धीर   धरें   अधीर  नहीं।

बात   उसकी   भी  सही,
मौत   की   सुबह   नहीं।
जिंदगी  भी  अमर  नहीं,
पर  जीवन  खतम नहीं।

जीवन  का  दस्तूर  यही,
आया  तो जाना है सही।

जो  अपने बस का नहीं,
खामोश रहना ही भली।
करो नहीं मन को अधीर,
कह रहा आपका "धीर"।
🍁🍁
✒.....धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"




ऐसे भी हालात.....

ऐसे भी हालात.....
🍁🍁              मंजर   ऐसी  बदहाली  का।      
                       साथ  नहीं कोई किसी का।।
                       जिन्दगी की सबको पड़ी है।
                       मौत  जब  सामने खड़ी है।।
लाश धरी कोई पास नहीं है।
रिश्ते  नाते  बेजान  रही है।।
देख   इंसा  मजबूर  मरा है।
मानव  मानवता से डरा है।।
                     डर  से   बेबस  दूर  खड़ा  हैं।
                     क्यों  न  रहे  जीवन  पड़ा हैं।।
                     फर्ज अदायगी दूर से करा है।
                     हालात बदल नहीं पा रहा है।।
डगमगा  रही  जीवन नैय्या।
किस  किनारे लगे रे भैय्या।।
धीर  धरें  प्रभु शीश नवैय्या।
सबके जीवन राम खेवैय्या।।
🍁🍁
✒......धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

Tuesday, 4 May 2021

लाकडाउन में सुरा प्रेम...

लाकडाउन में सुरा प्रेम...
🍁🍁 
सुरा सोम रस  प्रेमी आशिक,
कोविड  से  वंचित  शोषित।
उखड़  रही थी अपनी साँसें,
सुस्त   काया  धुमिल  नजरें।

सही समय से घोषणा  होता,
वर्ना घर काल कोठरी होता।
सुध   लेती  अपनी  सरकार,
दुकान खुली मदिरा की यार।

सुन  स्फूर्ति  तन  मन  आई,
नींद  उड़ी जाग रात बिताई।
भोरहरिए  पैण्ट  शर्ट  चढ़ाई,
पहुँच  गया  दुकान पर भाई।

जब  नम्बर  सौवां पर लागा,
मिलने  की संभावना जागा।
शुरूर  शुरू  जेहन में अपने,
उछल कूद धड़कन में अपने।

चाहत    अपना   रंग  लाया,
हाथ  में  जब  बोतल आया।
सरकार  का  तब  गुन गाया,
छक  कर खूब जश्न मनाया।

खतम  जश्न और घर आया,
बेगम  ने  खूब  भूत  उतारा।
झाड़ू  चप्पल  हुआ  आरती,
गाली  गुफ्ता  दे गई सारथी।

मिला सोमरस भूला भारती,
क्या हुआ थोड़ा हुआ आरती।
♨♨
✒....धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

Friday, 23 April 2021

वाह रे इंसान.....

वाह रे इंसान.....
🍁🍁 
मचा   रहे   चहूओर   हाहाकार,
फेसबुक ह्वाट्सअप चैनल मार। 
बेहिचक  संकट दिखा सुनाकर,
जो जिन्दा उन्हें बीमार बनाकर।

इनको  प्रभु  पहले  ही  उठालो,
संकट  से   अवमुक्त   करा  दो।
मौत  के   ये   सौदागर  बड़े  हैं,
लाशों   पर   रोटियाँ  सेंकते  हैं।

राह असान बनें नहीं कोई आस,
समय  से  पहले  उखड़ते सांस।
सबको  अपनी  अपनी  पड़ी है,
अमर  नहीं पर सबको जीनी है।

घर   परिवार   चाहे  हो  समाज,
फर्ज    अदायगी    करे   इंसान।
दायित्वों   को    कब   समझता,
बस   एक  दूसरे  को   कोसता।

देख  सुन   मन  व्यथित  अधीर,
लिखने के सिवा करे क्या "धीर।
🍁🍁
✒....धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

Saturday, 17 April 2021

अब देखो केवल डीडी....

अब देखो केवल डीडी....
🙄
बैठी  सुन्दर चपला लेडी,
हर चैनल पे बैईठ पेरती।
टीआरपी  टाईट जिसकी,
जुटा कर राज नेता देशी।
रम्मा झाउर करे ओझैती,
टीवी पे फिर मचे बकैती।
🙈
टीवी  मेरा   बिजली  मेरा,
समय  मेरा  रिचार्ज  मेरा।
उल्लू  उसके  बाद बनता,
मुरख डिस्प्रिन  निगलता।
अच्छाई कभी न दिखाती,
बुराई घूम घूम के नचाती।
🙊
बंद करो हल्लाबोल टक्कर,
दंगल में जनता घनचक्कर।
🙉
अब   देखो   केवल डीडी,
प्यारी डीडी अपनी डीडी।
🙄
✒.....धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

Monday, 15 March 2021

क्या हो जाता....

क्या हो जाता गर हम खामोश रह जाते।

चंद लम्हों के रिश्तों में तम नहीं आते।

क्रोध प्रेम प्यार अपने गर समझ पाते।

कम से कम जीवन में सबके गम नहीं आते।

🙄

सत्य शाश्वत सत्य है जाएगा जो आया।

वक्त  का संतोष होता  दुख बेवक्त देता।

जिन्दगी  जिन्दादिली  संघर्ष  से  नाता।

क्रोध व नफरत इंसा के प्राण हर जाता।

🙄

क्या हो जाता हम अगर खामोश रह जाते..?

😣

धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"....✒

Sunday, 14 March 2021

बुढ़ापा बिमारी और ईलाज....

बुढ़ापा बिमारी और ईलाज....
❤❤
आ रहा है बुढ़ापा समस्या तमाम है,
बीपी  शुगर ब्लाकेज से परेशान है।

बीपी  सामान्य  हो  गिरे  न  चढ़ेगा,
दिल का ब्लाकेज कभी नहीं होगा।

मानो  न  मानो  समझो और जानो,
कुंवारे वाले  लफ़्ज प्रेमी सा बोलो।

दिल  दिमाग  मन फूंफकारे मारेगा,
कुलाचे मारे दिल ब्लाकेज खुलेगा।

दिल  की  बिमारी कभी नहीं होगा,
बीपी का नामो निशान नहीं होगा।

असर  जिस्म  के रोएं रोएं में होगा,
खुशी  मन  होगा  सुखी तन होगा।

निःशुल्क ईलाज है आदत में घोलो,
रुपये  पैसों  से  कभी  नहीं  तौलो।
❤❤

✒......धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

खर्राटा मच्छर पत्नी.....

खर्राटा मच्छर पत्नी.....
🙊
रात  मच्छर, पत्नी ने धुन छेड़ दी।
यार  सुबह हो गयी मेल्हते मेल्हते।

मच्छर  दूर हुआ फैन चालू किया।
झेल  तब  मैं गया धुन पत्नी चली।

खर्राटा  पत्नी  फर्राटा भरने लगी।
यार  सुबह हो गयी मेल्हते मेल्हते।

दुश्मनों  में  मेरी  रात  ऐसी फंसी।
रात  भर  नींद  मेरी  तड़पती रही।

जालिम  रात  के  दुश्मनी  साधते।
बेचारे  हम पति  कुछ कर न सके।

नींद लगती नहीं प्यास लगती बड़ी।
परेशां हो गए बाथरूम जाते आते।

वो  घड़घड़ाते  रहे  और  सोते रहे।
थक  गए  हम उठक बैठक करके।

मच्छरों का ईलाज जैसे तैसे बहुत।
खर्राटे  का  ईलाज  बताओ  कोई।
😀
✒....धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

Saturday, 13 March 2021

युवा जाए विदेश....

युवा जाए विदेश....
🍁🍁
गर्व  माता  पिता को, बेटा  रहता  विदेश  में।
जी  रहा  वो जिन्दगी, अपने  धुन  विदेश में।
हुयी  रिश्तों  की उम्र, आज रूपयों से छोटी।
दिल  से कौन सोचता, अपने  माँ  बाप  की।

गर्व  माता  पिता  का, दिल  से  पूछा  कभी।
कितना  पैसा  चाहिए, क्या   नहीं   देश   में।
टूट   जाते  छूट  जाते,  हो   जाते    खामोश।
बस   गये  अपने  दूर,  कोई   बुला  न  सके।

सोचता   स्नेह   वश,  बुलाने   में   खर्च   है।
जोड़   लेता  हिसाब,  उन्हें  बुलाए  तो  कैसे।
सोच  मैं  रूक  गया, मन  से  बोल न सका।
तब  गलत   हो  गया, उसको  दर्द  हो गया।

अजनबी   जहान   में,  गुम  नाम   जिन्दगी।
समझना   यार  यही,  जुड़ी  और  जिन्दगी।
रहना  अपने  देश में,  क्या   नहीं   देश   में।
रूपया  पैसा समाज, सब   अपने   देश  में।
🍁🍁
✒....धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

Wednesday, 3 March 2021

जीवन का वायरस....

जीवन का वायरस....
🦀🦀
कमियों को वायरस समझना,
अपने मन मस्तिष्क न रखना।

खुशियों का दुश्मन यह होता,
जीवन को बर्बाद नहीं करना।

मन  अपना   एक्टिव  रखना,
एन्टी  वायरस  इसे समझना।

मन  स्वस्थ  तो  पंगू  वायरस,
मन कमजोर अपने न करना।

कमियाँ  चाहे जिस किसी की,
हमेशा  याद  नहीं  करने  की।

🦀🦀
✒.....धीरेन्द्र श्रीवास्तव "धीर"

ससुराल मायका बहू बेटी...

ससुराल मायका बहू बेटी... 🍁🍁   ससुराल मायका बहू बेटी! दोनों जहान आबाद करती। मायके से ट्यूशन गर लिया, दुखों का जाल बिछा लेती। जहां कभ...